अम्बुबाची मेला 2027 की सम्पूर्ण जानकारी (Ambubachi Mela 2026 all Information)

अम्बुबाची मेला 2027 की सम्पूर्ण जानकारी (Ambubachi Mela 2026 all Information)

इस पेज पर हम अम्बुबाची मेला के बारे में सम्पूर्ण जानकारी प्रदान कर रहे हैं। अगर आप अम्बुबाची पर्व के बारे में पहले से जानते हैं तो आपको पता होगा की यह त्यौहार माँ कामाख्या मंदिर जो की असम गुवाहाटी में स्थित में हैं में मनाया जाता है। अम्बुबाची मेला हर वर्ष जून के महीने में मनाया जाता है। आगे हम अम्बुबाची मेले से सम्बंधित सारी जानकारी दे रहे हैं।

अम्बुबाची मेला क्या है ?

अम्बुबाची मेला एक धार्मिक त्यौहार है जो की हर वर्ष माँ कामाख्या मंदिर में मनाया जाता है। यह त्यौहार 3 से 4 दिन तक मनाया जाता है। इस मेले के दौरान देश दुनिया के बहुत सारे श्रद्धालु माँ कामाख्या मंदिर आते हैं और माँ कामाख्या के दर्शन करने के बाद प्रस्थान करते हैं। इस मेले को लेकर धारणा यह है की यहाँ पर साधु संत अपनी सिद्धियों को प्राप्त करते हैं।

कब और क्यों मनाया जाता है अम्बुबाची मेला ?

यह पर्व माँ कामाख्या मंदिर में प्रत्येक वर्ष जून के महीने में मनाया जाता है। यह पर्व 22 जून से लेकर 26 जून तक मनाया जाता है। इस पर्व को मानाने के कारण को जानने के लिए आपको जानना होगा की माँ कामाख्या मंदिर बना कैसे और यहाँ पर किस की मूर्ति लगी हुई है।

आपको बता दें की माँ कामाख्या मंदिर कामरूप नामक स्थान पर नीलांचल पर्वत पर स्थित है और इस पर्वत पर भगवान शिव की पत्नी सती का यौनांग गिरा था। क्योकिं सती के जले हुए मृत शरीर को लेकर भगवान शिव तांडव कर रहे थे और इस तांडव के प्रकोप से बचने के लिए भगवान विष्णु ने सती के शरीर को अपने सुदर्शन चक्र से काट दिया था और उनके शरीर के अंग पृथ्वी पर कई स्थानों पर गिर रहे थे और जिन जिन स्थानों पर माता सती के अंग गिरे उन उन स्थानों पर शक्ति पीठ का निर्माण हुआ और ऐसे ही 51 स्थानों पर माता सती के अंग गिरे जिनसे 51 शक्ति पीठ बनें।

Ambubachi mela 2026

कामरूप नामक स्थान पर नीलांचल पर्वत पर माता सती का यौनांग गिरा जिससे माँ कामाख्या शक्ति पीठ यानी की कामाख्या मंदिर का निर्माण हुआ। माँ कामाख्या मंदिर में किसी भी देवी या देवता की मूर्ति नहीं है सिर्फ माता सती का यौनांग शिला के रूप में स्थित है। और इसलिए हर वर्ष श्रद्धालु माता के रजस्वला होने का पर्व तीन दिन तक मनाते हैं और इस दौरान मंदिर के द्वार बंद कर दिए जाते हैं। मंदिर में किसी भी व्यक्ति का प्रवेश वर्जित कर दिया जाता है लेकिन श्रद्धालु इस तीन दिन मंदिर के बाहर बैठकर पूजा अर्चना करते हैं और साधु संत अपनी सिद्धियां प्राप्त करते हैं।

तीन दिन के बाद मंदिर के द्वार खोले जाते हैं और साफ सफाई करने के बाद माँ कामाख्या के दर्शन सभी श्रद्धालु करना शुरू करते हैं। इस दौरान अत्यधिक भीड़ होती है क्योकिं मंदिर बंद होने के खुलने के बाद का दर्शन बहुत ही शुभ माना जाता है।

वर्ष 2026 में अम्बुबाची मेला कब मनाया जायेगा ?

वर्ष 2026 में अम्बुबाची मेला मनाये जाने की जानकारी नीचे दी हुई है :

मंदिर बंद करने का दिन  22 जून 2026, दिन – सोमवार
मंदिर बंद रहने का समय  22 जून , दिन – सोमवार से 25 जून, दिन – गुरुवार तक
मंदिर खुलने का दिन  26 जून 2026, दिन – शुक्रवार को
दर्शन करने का दिन  26 जून 2026, दिन – शुक्रवार से

Ambubachi mela 2026

अम्बुबाची मेले के दौरान कौन सा प्रसाद मिलता है ?

अम्बुबाची मेले के दौरान ऐसी मान्यता है की माँ कामाख्या के रजस्वला होने के उपरांत रक्त लगा हुआ वस्त्र प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है। क्योकिं लोग कहते हैं की माता के यौनांग पर सफेद वस्त्र बिछा दिया जाता है और फिर जब मंदिर खोला जाता है तो माता की रज की वजह से वह सफेद वस्त्र लाल हो जाता है और इसी वस्त्र को भक्तों में प्रसाद के रूप में बांटा जाता है।

ऐसा कहा जाता है की माँ कामाख्या मंदिर परिसर में बहुत सारे लोग साधु संत बनकर ऐसे ही वस्त्र को देने के लिए वहां के श्रद्धालुओं से ज्यादा पैसे की मांग करते हैं। इस बात में कितनी सच्चाई है इसके बारे में हमें कोई जानकारी नहीं प्राप्त है।

Ambubachi mela 2026

कामाख्या मंदिर क्यों प्रसिद्द है ?

माना जाता है की कुल 51 शक्तिपीठों में माँ कामाख्या शक्ति पीठ यानी की कामाख्या मंदिर सबसे शक्तिशाली पीठ है। क्योकिं यह शक्ति पीठ माता के उस अंग से बना हुआ है जिससे सृष्टि का उदय होता है। और क्योकिं यह शक्ति पीठ भगवान शिव से भी सम्बंधित है इसलिए इस पीठ की महिमा सबसे अधिक मानी गई है।

इसके अलावा माँ कामख्या मंदिर के अन्य कई सारे रहस्य भी हैं और ऐसा कहा जाता है की यहाँ पर जानवरों और पक्षियों की बलि देने की प्रथा यहाँ पर अभी भी चलती है, हालाकिं पूरे पूरे भारत में किसी भी प्रकार की बलि प्रथा पर रोक लगाई जा चुकी है लेकिन यहाँ पर कहा जाता है की चोरी छुपे बलि प्रथा आज भी चलती है।

उमानंद भैरव मंदिर

अगर आप माँ कामाख्या मंदिर की बात करते हैं तो आप यहाँ से कुछ दूर स्थित और ब्रह्मपुत्र नदी में बने हुए टापू पर स्थित उमानंद भैरव मंदिर की भी बात करना जरुरी है क्योकिं यह माँ कामाख्या के भैरव के रूप में माने जाते हैं। उमानंद भैरव मंदिर एक भव्य स्थान पर स्थित हैं जो की ब्रह्मपुत्र नदी में बने हुए एक टापू पर है। यह मंदिर मयूर दीप पर बना हुआ है जहाँ पर आप नाव या मोटरबोट के माध्यम से जा सकते हैं। धारणा यह है की अगर आप माँ कामाख्या मंदिर के दर्शन के लिए आते हैं तो आपको उमानंद भैरव मंदिर के दर्शन भी जरूर करने चाहिए।

Umanand Bhairav Mandir